रविवार, 1 सितंबर 2013

कविता : " मेरी तमन्ना "


बनुं मे उनके सुख का कारण, मुझसे कोई भूल न हो

उन बिन जीवन ऐसी बगिया, जहाँ एक भी फूल न हो

जिस दुआ मे नही वो शामिल, वो दुआ मेरी कबूल न हो

कलियों को उनकी राह बिछाउं, जिसमे एक भी शूल न हो

उनके लिये वहाँ घर बनाउं, जहाँ गली मे उडती धूल न हो

कर्ज सा हो उन पर मेरा प्यार, ब्याज बढ़े, कम मूल न हो

किश्ते वो सदा पूरी चुकायें, जीवन भर कर्ज वसूल न हो

विश्वास की डोर मे बंधे रहें हम, फरेब उनका उसूल न हो

समर्पण पुष्प से भरा हो दामन, स्वार्थ का उसमें बबूल न हो

सुरS

4 टिप्‍पणियां:

  1. विश्वास की डोर मे बंधे रहें हम, फरेब उनका उसूल न हो-------सुन्दर रचना। …. कृपया वेरिफिकेशन हटाये

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  2. hardik sadhubad roy sir. me samzha nahi verification hatane ke baare me

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  3. कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।


    संजय भास्‍कर
    शब्दों की मुस्कुराहट
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  4. सम्मानित संजय भास्‍करजी, हार्दिक आभार आपका

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